Fassara da yaren Indiya - Azizul Haƙ al-Umari
Fassarar ma'anonin Alkur'ani mai girma
Azizul Haƙ al-Umari ne ya fassara.
وَٱلۡعَٰدِيَٰتِ ضَبۡحٗا
क़सम है उन घोड़ों की, जो पेट से साँस की आवाज़ निकालते हुए डौड़ने वाले हैं!
فَٱلۡمُورِيَٰتِ قَدۡحٗا
फिर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालने वाले घोड़ों की क़सम!
فَٱلۡمُغِيرَٰتِ صُبۡحٗا
फिर सुबह के समय हमला करने वाले (घोड़ों) की क़सम!
فَأَثَرۡنَ بِهِۦ نَقۡعٗا
फिर उससे धूल उड़ाते हैं।
فَوَسَطۡنَ بِهِۦ جَمۡعًا
फिर वे उसके साथ (दुश्मन की) सेना के बीच घुस जाते हैं।
إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لِرَبِّهِۦ لَكَنُودٞ
निःसंदेह इनसान अपने पालनहार का बड़ा कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
وَإِنَّهُۥ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٞ
और निःसंदेह वह इसपर स्वयं गवाह है।[1]
وَإِنَّهُۥ لِحُبِّ ٱلۡخَيۡرِ لَشَدِيدٌ
और निःसंदेह वह धन के मोह में बड़ा सख़्त है।[2]
۞ أَفَلَا يَعۡلَمُ إِذَا بُعۡثِرَ مَا فِي ٱلۡقُبُورِ
तो क्या वह नहीं जानता, जब क़ब्रों में जो कुछ है, निकाल बाहर किया जाएगा?
وَحُصِّلَ مَا فِي ٱلصُّدُورِ
और जो कुछ सीनों में है, वह प्रकट कर दिया जाएगा।[3]
إِنَّ رَبَّهُم بِهِمۡ يَوۡمَئِذٖ لَّخَبِيرُۢ
निःसंदेह उनका पालनहार उस दिन उनके बारे में पूरी ख़बर रखने वाला है।[4]
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