Fassara da yaren Indiya - Azizul Haƙ al-Umari
Azizul Haƙ al-Umari ne ya fassara.
وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ
क़सम है आकाश की तथा रात में प्रकट होने वाले की!
وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ
और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होने वाला क्या है?
ٱلنَّجۡمُ ٱلثَّاقِبُ
वह चमकता हुआ सितारा है।
إِن كُلُّ نَفۡسٖ لَّمَّا عَلَيۡهَا حَافِظٞ
प्रत्येक प्राणी पर एक निरीक्षक नियुक्त है।[1]
فَلۡيَنظُرِ ٱلۡإِنسَٰنُ مِمَّ خُلِقَ
अतः इनसान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है?
خُلِقَ مِن مَّآءٖ دَافِقٖ
वह एक उछलने वाले पानी से पैदा किया गया है।
يَخۡرُجُ مِنۢ بَيۡنِ ٱلصُّلۡبِ وَٱلتَّرَآئِبِ
जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच से निकलता है।
إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجۡعِهِۦ لَقَادِرٞ
निःसंदेह वह उसे लौटाने में निश्चय सक्षम है।[2]
يَوۡمَ تُبۡلَى ٱلسَّرَآئِرُ
जिस दिन छिपी हुई बातों की जाँच-पड़ताल की जाएगी।
فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةٖ وَلَا نَاصِرٖ
तो (उस दिन) उसके पास न कोई शक्ति होगी और न ही कोई सहायक।[3]
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجۡعِ
क़सम है बार-बार बारिश बरसाने वाले आसमान की।
وَٱلۡأَرۡضِ ذَاتِ ٱلصَّدۡعِ
तथा फटने वाली धरती की।
إِنَّهُۥ لَقَوۡلٞ فَصۡلٞ
निश्चय ही यह (क़ुरआन) एक निर्णायक कथन है।
وَمَا هُوَ بِٱلۡهَزۡلِ
और यह हँसी-मज़ाक़ नही है।[4]
إِنَّهُمۡ يَكِيدُونَ كَيۡدٗا
निःसंदेह वे गुप्त उपाय करते हैं।
وَأَكِيدُ كَيۡدٗا
और मैं भी गुप्त उपाय करता हूँ।
فَمَهِّلِ ٱلۡكَٰفِرِينَ أَمۡهِلۡهُمۡ رُوَيۡدَۢا
अतः काफ़िरों को मोहलत दे दें, उन्हें थोड़ी देर के लिए छोड़ दें।[5]
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