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Terjemahan Berbahasa India

Terjemahan makna Al-Qur`ān Al-Karīm ke bahasa India oleh Maulana Azizulhaq Al-'Umari.

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ٱلۡحَآقَّةُ

होकर रहने वाली।

होकर रहने वाली।

مَا ٱلۡحَآقَّةُ

क्या है वह होकर रहने वाली?

क्या है वह होकर रहने वाली?

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡحَآقَّةُ

और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?

और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?

كَذَّبَتۡ ثَمُودُ وَعَادُۢ بِٱلۡقَارِعَةِ

समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।

समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।

فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهۡلِكُواْ بِٱلطَّاغِيَةِ

फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।

फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।

وَأَمَّا عَادٞ فَأُهۡلِكُواْ بِرِيحٖ صَرۡصَرٍ عَاتِيَةٖ

और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।

और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।

سَخَّرَهَا عَلَيۡهِمۡ سَبۡعَ لَيَالٖ وَثَمَٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومٗاۖ فَتَرَى ٱلۡقَوۡمَ فِيهَا صَرۡعَىٰ كَأَنَّهُمۡ أَعۡجَازُ نَخۡلٍ خَاوِيَةٖ

अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।[1]

1. उनके भारी और लंबे होने की उपमा खजूर के तने से दी गई है।
अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।[1]

فَهَلۡ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٖ

तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?

तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?

وَجَآءَ فِرۡعَوۡنُ وَمَن قَبۡلَهُۥ وَٱلۡمُؤۡتَفِكَٰتُ بِٱلۡخَاطِئَةِ

और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।

और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।

فَعَصَوۡاْ رَسُولَ رَبِّهِمۡ فَأَخَذَهُمۡ أَخۡذَةٗ رَّابِيَةً

उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।

उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।

إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلۡمَآءُ حَمَلۡنَٰكُمۡ فِي ٱلۡجَارِيَةِ

निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव[2] में सवार किया।

2. इसमें नूह़ (अलैहिस्सलाम) के तूफ़ान की ओर संकेत है। और सभी मनुष्य उनकी संतान हैं, इस लिए यह दया सब पर हुई है।
निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव[2] में सवार किया।

لِنَجۡعَلَهَا لَكُمۡ تَذۡكِرَةٗ وَتَعِيَهَآ أُذُنٞ وَٰعِيَةٞ

ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।

ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।

فَإِذَا نُفِخَ فِي ٱلصُّورِ نَفۡخَةٞ وَٰحِدَةٞ

फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।

फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।

وَحُمِلَتِ ٱلۡأَرۡضُ وَٱلۡجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةٗ وَٰحِدَةٗ

और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।[3]

3. दोखिए : सूरत ताहा, आयत : 20, आयत : 103, 108.
और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।[3]

فَيَوۡمَئِذٖ وَقَعَتِ ٱلۡوَاقِعَةُ

तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।

तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।

وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِيَ يَوۡمَئِذٖ وَاهِيَةٞ

तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।

तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।

وَٱلۡمَلَكُ عَلَىٰٓ أَرۡجَآئِهَاۚ وَيَحۡمِلُ عَرۡشَ رَبِّكَ فَوۡقَهُمۡ يَوۡمَئِذٖ ثَمَٰنِيَةٞ

और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।

और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।

يَوۡمَئِذٖ تُعۡرَضُونَ لَا تَخۡفَىٰ مِنكُمۡ خَافِيَةٞ

उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।

उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।

فَأَمَّا مَنۡ أُوتِيَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقۡرَءُواْ كِتَٰبِيَهۡ

फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।

फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।

إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَٰقٍ حِسَابِيَهۡ

मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।

मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।

فَهُوَ فِي عِيشَةٖ رَّاضِيَةٖ

चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।

चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।

فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٖ

एक ऊँची जन्नत में।

एक ऊँची जन्नत में।

قُطُوفُهَا دَانِيَةٞ

जिसके फल निकट होंगे।

जिसके फल निकट होंगे।

كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ هَنِيٓـَٔۢا بِمَآ أَسۡلَفۡتُمۡ فِي ٱلۡأَيَّامِ ٱلۡخَالِيَةِ

(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।

(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।

وَأَمَّا مَنۡ أُوتِيَ كِتَٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي لَمۡ أُوتَ كِتَٰبِيَهۡ

और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।

और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।

وَلَمۡ أَدۡرِ مَا حِسَابِيَهۡ

तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!

तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!

يَٰلَيۡتَهَا كَانَتِ ٱلۡقَاضِيَةَ

ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली[4] होती।

4. अर्थात उसके पश्चात् मैं फिर जीवित न किया जाता।
ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली[4] होती।

مَآ أَغۡنَىٰ عَنِّي مَالِيَهۡۜ

मेरा धन मेरे किसी काम न आया।

मेरा धन मेरे किसी काम न आया।

هَلَكَ عَنِّي سُلۡطَٰنِيَهۡ

मेरी सत्ता[5] मुझसे जाती रही।

5. इसका दूसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि परलोक के इनकार पर जितने तर्क दिया करता था आज सब निष्फल हो गए।
मेरी सत्ता[5] मुझसे जाती रही।

خُذُوهُ فَغُلُّوهُ

(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।

(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।

ثُمَّ ٱلۡجَحِيمَ صَلُّوهُ

फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।

फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।

ثُمَّ فِي سِلۡسِلَةٖ ذَرۡعُهَا سَبۡعُونَ ذِرَاعٗا فَٱسۡلُكُوهُ

फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।

फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।

إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ ٱلۡعَظِيمِ

निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।

निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।

وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلۡمِسۡكِينِ

तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।

तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।

فَلَيۡسَ لَهُ ٱلۡيَوۡمَ هَٰهُنَا حَمِيمٞ

अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।

अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।

وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنۡ غِسۡلِينٖ

और न पीप के सिवा कोई भोजन है।

और न पीप के सिवा कोई भोजन है।

لَّا يَأۡكُلُهُۥٓ إِلَّا ٱلۡخَٰطِـُٔونَ

जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।

जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।

فَلَآ أُقۡسِمُ بِمَا تُبۡصِرُونَ

मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।

मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।

وَمَا لَا تُبۡصِرُونَ

तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।

तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।

إِنَّهُۥ لَقَوۡلُ رَسُولٖ كَرِيمٖ

निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल[6] का कथन है।

6. यहाँ सम्मानित रसूल से अभिप्राय मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। तथा सूरत अत्-तक्वीर आयत : 19 में फ़रिश्ते जिबरील (अलैहिस्सलाम) जो वह़्यी लाते थे वह अभिप्राय हैं। यहाँ क़ुरआन को आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन इस अर्थ में कहा गया है कि लोग उसे आपसे सुन रहे थे। और इसी प्रकार आप जिबरील (अलैहिस्सलाम) से सुन रहे थे। अन्यथा, वास्तव में, क़ुरआन अल्लाह का कथन है, जैसा कि आगामी आयत : 43 में आ रहा है।
निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल[6] का कथन है।

وَمَا هُوَ بِقَوۡلِ شَاعِرٖۚ قَلِيلٗا مَّا تُؤۡمِنُونَ

और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।

और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।

وَلَا بِقَوۡلِ كَاهِنٖۚ قَلِيلٗا مَّا تَذَكَّرُونَ

और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।

और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।

تَنزِيلٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।

(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।

وَلَوۡ تَقَوَّلَ عَلَيۡنَا بَعۡضَ ٱلۡأَقَاوِيلِ

और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर[7] लगाता।

7. इस आयत का भावार्थ यह कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अपनी ओर से वह़्य (प्रकाशना) में कुछ अधिक या कम करने का अधिकार नहीं है। यदि वह ऐसा करेंगे, तो उन्हें कड़ी यातना दी जाएगी।
और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर[7] लगाता।

لَأَخَذۡنَا مِنۡهُ بِٱلۡيَمِينِ

तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।

तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।

ثُمَّ لَقَطَعۡنَا مِنۡهُ ٱلۡوَتِينَ

फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।

फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।

فَمَا مِنكُم مِّنۡ أَحَدٍ عَنۡهُ حَٰجِزِينَ

फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।

फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।

وَإِنَّهُۥ لَتَذۡكِرَةٞ لِّلۡمُتَّقِينَ

निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।

निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।

وَإِنَّا لَنَعۡلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ

तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।

तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।

وَإِنَّهُۥ لَحَسۡرَةٌ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ

और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों[8] के लिए पछतावे का कारण है।

8. अर्थात जो क़ुरआन को नहीं मानते, वे अंततः पछताएँगे।
और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों[8] के लिए पछतावे का कारण है।

وَإِنَّهُۥ لَحَقُّ ٱلۡيَقِينِ

और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।

और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।

فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِيمِ

अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।

अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।
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